माना कि राष्ट्रीय पुरस्कार को रास्ते पर छोड़ना नहीं चाहिए लेकिन जरा सोचिए कि जब कोई राष्ट्रीय पुरस्कार को ऐसे रास्ते पर छोड़ता है तो उस पर क्या बीती होगी?
@bajrangpunia ने अपना पद्मश्री पुरस्कार को रास्ते पर छोड़ दिया है और यह बात देश के लिए बड़ी दुःख की बात हैं।
जब कोई व्यक्ति अपना राष्ट्रीय पुरस्कार को ऐसे त्याग देता है तो इसमें सोचने की बात हैं कि कितनी बड़ी विडम्बना रही होगी? आखिर क्यों सरकार भ्रष्ट नेताओ को सवार रही है? क्या देश में अच्छे नेता हे ही नहीं?
इन्होंने देश के लिए कई मेडल लाए हैं। कई बार देश का नाम रोशन किया है। न जाने कितने बार तो विदेशी धरती पर तिरंगा लहराया है। और फिर भी देश में इनके साथ अन्याय किया जाए तो फिर ये बड़े दुःख की बात हैं।
एक बार सरकार को इनकी बात तो सुननी चाहिए की नहीं? क्यों सरकार इनसे बात नहीं करती? इसी तो सरकार की क्या मजबूरी है?
में तो सिर्फ इतना ही कहूंगा कि "दुर्जन के शब्दों से ज्यादा सज्जन का मौन हानिकारक होता है"
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